गज़ल
दोस्त भी देते रहते दग़ा वक्त पर
कोई करता नहीं है भला वक्त पर
कोई देता नहीं आसरा वक्त पर
सब के सब हो रहें हैं ख़फ़ा वक्त पर
मैं दुआ दे रहा हूं उसे आज तक
साथ जिसने भी मेरा दिया वक्त पर
उसने हर हाल में साथ मेरा दिया
क़ाम उसके भी मैं आऊंगा वक्त पर
जब जरूरत पड़ी वो तो मिलता नहीं
वो तो जाकर कहीं छुप गया वक्त पर
ढूंढ़कर देखिये काश कोई मिले
कोई मिलता नहीं काम का वक्त पर
सिर्फ वादे ही वादे वो करते रहे
काम कुछ भी नहीं हो सका वक्त पर
मैं अकेले ही बढ़ता गया दोस्तों
साथ किसने दिया है मेरा वक्त पर
अब तो गौहर वो खामोश रहने लगा
कुछ न कुछ सोंचता जो रहा वक्त पर
गज़लकार :
रियाज़ खान गौहर
भिलाई – जिला दुर्ग (छ०ग०)