
“”””””””””देवारी तिहार मनाँबो””””””””””
चल न संगवारी गाँव जाबो
देवारी तिहार मनाँबो
शहर म तो हरहर कटकट हे
गाँव के मजा उड़ाबो
चल न संगवारी “”””””””””””
गाँव के घर ल बहार बटोर के
छाब मूंद के सजाबो
चारो मुड़ा म दीया ल जला के
जगमग अंजोरी बगराबो
देवता धामी म दीया ल चढ़ा के
खुशी के आसिष पाबो
चल न संगवारी गाँव “”””””””””””
धन तेरस नवाँ जीनिस बिसाबो
दाई लक्षमी ल मनाँबो
नरक चऊदस यमदेव ल सुमर के
यम दीया अलग मड़ाबो
इशर गौरा के बिहाव म हमू मन
बराती बनके धूम मचाबो
चल न संगवारी गाँव “””””””””””””
गोबरधन के परबत ल बनाँबो
ओमा गऊ माता के गोड़ खुंदाबो
गड़वा बाजा संग दोहा पारत
गोबरधन के टीका लगाबो
बम सुरसुरी अऊ चरखी चलाबो
अम्मटहा कोहड़ा कोचई खाबो
चल न संगवारी गाँव “””””””””””
ठेठवार के संग मातर जगाबो
खोड़हर के आगु माथ नवाबो
गाय बईला ल सोहई बंधाबो
केंवट पारा ले मड़ई ल लाबो
छत्तीसगढ़ के ये जबर तिहार ऐ
जीयत भर सुरता लमाबो
चल न संगवारी गाँव जाबो
देवारी तिहार मनाँबो
शहर म तो हरहर कटकट हे
गाँव के मजा उड़ाबो
रचयिता
इस्माइल आजाद जामुल भिलाई
जिला दुर्ग छत्तीसगढ़ मो08815134606

