
सी. जी. प्रतिमान न्यूज 3 नवम्बर / आज जाति धर्म लोगों में इस कदर हावी हो गया है कि इसके नाम पर लोग कुछ भी करने को तैयार हो जाते हैं। यह कट्टरता कहाँ से आ रहा है।

जब बौद्धिक क्षमता कम जाता है तब चेतना शून्य हो जाता है बौद्धिकता कलम या जुबान की जादूगरी नहीं है ।यह त्याग ,निडरता है। पहले विपन्नता में भी वैचारिक संपन्नता थी लेकिन आज स्थिति ठीक इसके विपरीत है।

राष्ट्रकवि दिनकर ने कहा था- जो तटस्थ हैं समय लिखेगा उसका भी अपराध। 1930 में महान अर्थशास्त्री केन्स ने भविष्य को सामने रखकर एक लेख ‘ इकोनॉमिक पॉसिबिलिटीज फ़ॉर आवर ग्रैंड सन ‘ में लिखा था। आज जाति धर्म के नाम पर भविष्य की बात कौन करे ? वर्तमान ही खराब हो रहा है।

बिहार में एक सिंधी होते जेपी कृपलानी सीतामढ़ी और भागलपुर से सांसद बने थे। मधु लिमये मुंगेर व बांका से जॉर्ज फर्नांडिस मुज्जफरपुर से बने थे। इनकी जाति व धर्म के कितने लोग उस क्षेत्र में थे। कर्पूरी ठाकुर सीएम बने इनकी जाति गिनती भर की है लेकिन बिहार के नेता बने थे। आज जब तक एक दूसरे की जाति धर्म नहीं पता कर लेते तब तक चैन ही नहीं मिलता है। हम मानव हैं ।मानवता हमारी पहचान है।
” हम कौन थे, क्या हो गए और क्या होंगें अभी
आओ विचारें आज मिलकर ये समस्या अभी……???

