गज़ल
उनका ज़ादू कुछ ऐसा चला आजकल
मुझपे छाने लगा नशा आजकल
रस्ते रस्ते मिली है ज़फा आजकल
ढूंढ़ता फिर रहा हूं वफ़ा आजकल
दूर हर किसी से हुआ जा रहा
आदमी आदमी क्या रहा आजकल
लिख रहा हूं वही मैनें देखा है जो
दिल मिरा बस यही कह रहा आजकल
अब तो शर्मों हया कुछ भी बांकी नहीं
सर का आंचल भी गायब हुआ आजकल
मैं तो हैरान हूं बस यही सोंचकर
इतना इंसान क्यों गिर गया आजकल
जिस्म की नुमाइश खुले आम है
और कपड़ा भी घटता गया आजकल
कल जहां रौशनी आ रही थी नज़र
क्यों अंधेरा नज़र आ रहा आजकल
फिर से गौहर ने सच कह दिया है मियां
सब की आंखों में वो चुभ रहा आजकल
गज़लकार
रियाज खान गौहर भिलाई