विश्व पर्यावरण दिवस 5 जून
पर विशेष :—
(सी०जी०प्रतिमान न्यूज)
जल ही जीवन है।
न सोचा जल अपव्यय का हल
बद से बदत्तर होगा आने वाला कल
जहां भी देखो बहता पानी
करो संग्रहण बात पुरानी
नहीं तो पड़ जायेगा सूखा
मरेगा इन्सान प्यासा भूखा
जल जीवन है जानो तुम
महिमा इनकी मानो तुम
ट्यूबेल है मुह का कौरा
हेन्ड पंप तुलसी का चौरा
गंगाजल सा लिए कमंडल
न्योछावर नोट का बन्डल
अब सुनिए भविष्य की वाणी
अगला युद्ध का मुद्दा पानी
बचत की जिसने आज न ठानी
याद आयेगी उनको नानी
वन मे अस्सी भाग है पानी
पंच तत्व का राग है पानी
अब तक के बेदाग है पानी
नही मिले तो आग है पानी।
प्रकाश सिंह ठाकुर
जामुल भिलाई नगर
जिला- दुर्ग छत्तीसगढ़