हिन्दी पत्रकारिता दिवस
हिन्दी पत्रकारिता की शुरुआत 30 मई 1826 को पेशे से वकील पं०जुगल किशोर शुक्ला द्वारा बंगाल में की गई थी। पत्र का नाम था ” उद्दत मार्तंड” मगर आर्थिक दबावों के कारण 4 दिसम्बर 1827 को ये पत्र बंद हो गया।
जन सरोकार हो पत्रकारिता का उद्देश्य
समाचार पत्रों को समाज का दर्पण माना जाता है। समाचार पत्र -पत्रिकाएं आम नागरिको को सशक्त बनाती है। हिन्दी पत्रकारिता आजा़दी के बाद लोकतंत्र के लिए पत्रकारिता रक्षक का कार्य करती है। जरुरत इस बात की है कि हिन्दी पत्रकारिता बौद्धिकता बरकरार रखे। उसे विकास और परिवर्तन का वाहक बनना होगा।
प्रजातांत्रिक व्यवस्था और समाज के माध्यम समन्वय, तारतम्यता एवं नागरिकों में दायित्व बोध कराने वाला चौथा स्तम्भ पत्रकारिता ही है ।
पत्रकारिता का विशाल संसार…… इक्कीसवीं सदी में जब इंटरनेट के प्रसार के कारण और मोबाइल क्रांति के कारण हर व्यक्ति पत्रकार होता जा रहा है। भारत में आँडियो -विजल, डिजिटल माध्यम और आँनलाइन मीडिया के दौर में भी प्रिंट मीडिया का विकास नहीं रुका है।
आज पत्रकार और पत्रकारिता के प्रतिमान बदल गए हैं या बदल दिये गये है। जिसका प्रमुख कारण मीडिया और पत्रकारिता का घोर व्यवसायिक होना है।
प्रेस का काम सूचना देने के साथ- साथ शिक्षित भी करना है। जनता को सरकार की नीतियों के बारे में अवगत कराना है। जनमत निर्धारित करने में उनकी महत्व पूर्ण भूमिका होती है और इसी कारण सम्पादकों, रिपोर्टरों से निष्पक्षता अपेक्षित होती है।
पन्ना लाल यादव