किसानों की शिकायत और मीडिया की सक्रियता के बाद प्रशासन ने लिया संज्ञान
दुर्ग 4 जनवरी / दुर्ग जिले में चल रहे उच्चदाब पारेषण लाइन निर्माण कार्यों को लेकर किसानों द्वारा लगातार उठाई गई आवाज़ के बाद प्रशासन को हस्तक्षेप करना पड़ा है। उपकेंद्र रसमड़ा से उपकेंद्र सेमरिया (132/33 केवी), उपकेंद्र पाटन से अण्डा (132/33 केवी), उपकेंद्र पाटन से अर्जुनी (132/33 केवी) तथा धमधा से ठेलकाडीह (220 केवी) उच्चदाब पारेषण लाइन निर्माण कार्यों में किसानों का आरोप था कि बिना मुआवज़ा निर्धारण एवं बिना सहमति के जबरन कार्य कराया जा रहा है।
प्रभावित किसानों द्वारा इस संबंध में जिला कलेक्टर दुर्ग, एसडीएम कार्यालय पाटन व दुर्ग तथा सम्भाग आयुक्त दुर्ग को लिखित आवेदन प्रस्तुत कर तत्काल निर्माण कार्य पर रोक लगाने की माँग की गई थी। किसानों की इस गंभीर समस्या को पत्रिका, नवभारत, हरिभूमि, दैनिक भास्कर, नई दुनिया, देशबंधु, नवप्रदेश, सीजी के गोठ, सीजी क्राइम न्यूज़, सीजी प्रतिमान न्यूज़ सहित अनेक प्रिंट एवं डिजिटल मीडिया माध्यमों ने प्रमुखता से उठाया।
मीडिया में लगातार खबरें प्रकाशित होने के बाद प्रशासन ने संज्ञान लेते हुए संबंधित उच्चदाब पारेषण लाइन निर्माण कार्यों पर रोक लगा दी, जिससे क्षेत्र के किसानों में राहत का माहौल है।
प्रभावित किसानों ने जनहित के मुद्दों को निर्भीकता से उठाने और किसानों की आवाज़ को शासन-प्रशासन तक पहुँचाने के लिए सभी मीडिया संस्थानों के प्रति आभार व्यक्त किया है। किसानों का कहना है कि वे विकास के विरोधी नहीं हैं, लेकिन कानून के तहत उचित मुआवज़ा, पूर्व सूचना और सहमति के बिना किसी भी प्रकार का निर्माण कार्य स्वीकार्य नहीं है।

किसान नेता ढालेश साहू : ने कहा कि “उच्चदाब पारेषण लाइन निर्माण के नाम पर किसानों की जमीन, फसल और भविष्य के साथ खिलवाड़ नहीं किया जा सकता। इंडियन टेलीग्राफ एक्ट 1885 एवं विद्युत अधिनियम 2003 के प्रावधानों के अनुसार बिना मुआवज़ा और सहमति के कार्य कराना अवैधानिक है। मीडिया की सक्रिय भूमिका से किसानों को न्याय की उम्मीद जगी है। यदि प्रशासन ने पारदर्शी तरीके से मुआवज़ा तय कर सहमति नहीं ली, तो किसान आगे भी शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से संघर्ष जारी रखेंगे।”








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