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निंदा- गुड़ाई : “एआइ रोबोट” की हुई ईजाद जो खेत में जाकर फसल और खरपतवार में अंतर पहचानकर केवल खरपतवार को ही निकालेगा बाहर ….

नई दिल्ली 3 अक्टूबर / भारत एक कृषि प्रधान देश है, यहाँ की लगभग 60 प्रतिशत आबादी प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से खेती पर निर्भर करती है। लेकिन आधुनिक युग में खेती सिर्फ मेहनत का खेल नहीं रही, बल्कि यह विज्ञान, तकनीक और नवाचार का संगम बन चुकी है। आज किसान केवल हल और बैलों, ट्रेक्टर तक सीमित नहीं हैं, बल्कि ड्रोन, सेंसर, मशीनरी और अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) जैसी अत्याधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल करने लगे हैं।

खेती की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है खरपतवार यानि खेत में उगने वाले अवांछित पौधे। ये पौधे फसल का पोषण चूस लेते हैं, उसकी वृद्धि रोकते हैं और उत्पादन पर बुरा असर डालते हैं। पारंपरिक रूप से किसान हाथ से या दवाओं (वीड कंट्रोलर/वीड किलर) का इस्तेमाल करके इन्हें हटाते हैं। लेकिन यह काम समय लेने वाला, श्रमसाध्य और कई बार महंगा भी होता है। इसी चुनौती का समाधान ढूँढा है बिहार के बाल वैज्ञानिक शशांक देव और उनके साथियों ने। उन्होंने एक ऐसा “एआइ रोबोट” विकसित किया है, जो खेत में जाकर फसल और खरपतवार में अंतर पहचानकर केवल खरपतवार को बाहर निकाल देता है। यह तकनीक किसानों के लिए एक वरदान साबित हो सकता है, क्योंकि अब मजदूरों की कमी, तेज धूप और कठिन परिश्रम की बाधाएँ कम होगी।

किसी भी खेत में खरपतवार का होना स्वाभाविक है। लेकिन इसकी वजह से किसान को कई दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। खरपतवार फसल की जड़ों से पानी और पोषक तत्व चूस लेता है। बहुत से खरपतवार कीट और फफूंद का घर होता है। मजदूर लगाकर या रसायन डालकर इन्हें हटाना पड़ता है। खरपतवार नाशक दवाएँ (वीडिसाइड) पर्यावरण और स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होता है। परंपरागत तौर पर किसान खरपतवार हटाने में लगभग 25-30 प्रतिशत समय और श्रम खर्च करते हैं। इससे उनकी खेती की लागत बढ़ जाता है।

पटना के शशांक देव एक बाल वैज्ञानिक के रूप में जाने जाते हैं। उनके साथ जयपुर के आरश (इनोवेशन हेड) और चारित्र पांडेय जुड़े हैं। तीनों ने मिलकर टीम डी-मेकाट्रॉनिकएक्स और कंट्रोल क्रॉप नामक समूह बनाया है और एक ऐसी मशीन पर काम शुरू किया है, जो किसानों की इस बड़ी समस्या को हल कर सके। उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), रोबोटिक्स और मेकाट्रॉनिक्स का उपयोग करके एक “एआइ बॉट” तैयार किया। यह बॉट न केवल खरपतवार को पहचान सकता है, बल्कि सावधानीपूर्वक उसे जड़ से निकाल भी देता है। टीम का कहना है कि छह दिन में यह रोबोट करीब पांच बीघा खेत से खरपतवार हटा सकता है। यह मानवीय श्रम की तुलना में कहीं तेज और सटीक है।

यह एआइ रोबोट इंसान की तरह काम करता है, लेकिन उससे कहीं ज्यादा दक्ष और सटीक है। इसमें एक हाई-रिजॉल्यूशन कैमरा लगा है, जो खेत की तस्वीरें लेता है। कैमरे से प्राप्त डाटा को प्रोसेस करके यह तय करता है कि कौन सा पौधा फसल है और कौन खरपतवार। रोबोट को पहले से प्रशिक्षित किया गया है कि गेहूँ, धान, मक्का जैसी फसलें कैसी दिखती हैं और कौन से पौधे खरपतवार की श्रेणी में आता है। पहचान के बाद यह आर्म उस खरपतवार को पकड़कर खींच लेता है। किसान इसे मोबाइल या कंट्रोलर से जोड़ सकते हैं और यदि कोई गड़बड़ी हो तो तुरंत रोक सकते हैं। सबसे खास बात यह है कि यह रोबोट फसल को नुकसान पहुँचाए बिना खरपतवार हटाता है। कम समय में ज्यादा खेतों से खरपतवार हटाता है। मजदूरों की आवश्यकता घटती है। महंगी वीडिसाइड दवाओं से छुटकारा मिलता है। खेत में रसायन का कम इस्तेमाल होता है। यह केवल खरपतवार को निकालता है, फसल को छेड़ता नहीं है।

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