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ग्रामीण श्रमिकों को गांधी जी ने रोजगार मांगने का अधिकार दिया था उसे राम जी ने छीन लिया – छत्तीसगढ़ श्रमिक मंच l

जी राम जी योजना में मोदी सरकार ने बड़े किसानों को गारंटी दी है किसानी के 60 दिन तक सस्ते पारिश्रमिक दर पर श्रमिक मिलेंगे

365 दिनों में औसत 50 दिन भी काम न दे पाने वाले 305 दिन में 125 दिन काम देने का सब्जबाग दिखा रहे हैं

सीजी प्रतिमान न्यूज़ :दुर्ग // छत्तीसगढ़ श्रमिक मंच ने मोदी सरकार द्वारा मनरेगा के स्थान पर लागू किए गए जी राम जी योजना को मजदूर विरोधी बताते हुए कहा है कि केंद्र सरकार ने साल के 365 दिनों में 100 दिन काम मांगने के ग्रामीण श्रमिकों के अधिकार को छीन लिया है,
छत्तीसगढ़ श्रमिक मंच के संयोजक एड राजकुमार गुप्त ने आरोप लगाया है कि सत्ता और शक्ति का संविधान विरोधी केंद्रीकरण करना, बड़े किसानों को सस्ती दरों में खेती के लिए 60 दिन तक श्रमिक मिलने की गारंटी देना और अंततः ग्रामीण श्रमिकों को रोजगार से वंचित करना सरकार का उद्देश्य है,
छत्तीसगढ़ श्रमिक मंच के संयोजक ने कहा है कि मनरेगा में काम के संबंध में निर्णय लेने का अधिकार ग्राम सभाओं के पास था लेकिन स्थानापन्न योजना में यह अधिकार छीनकर अपने पास रख लिया है, मनरेगा में कुल बजट की राशि का 90% केंद्र सरकार द्वारा दिया जाता था राज्यों पर मात्र 10% राशि देने का दायित्व था, नई योजना में केंद्र सरकार ने अपना आर्थिक बोझ 30% कम करके 60% कर लिया है जबकि पहले से कर्ज में डूबे राज्यों पर आर्थिक बोझ 30% बढ़ाकर 40% कर दिया गया है
छत्तीसगढ़ श्रमिक मंच के संयोजक ने आगे कहा है कि पूर्व में मांग के अनुसार केंद्रीय बजट में 60 से लेकर 90 हजार करोड़ रुपए का प्रावधान किया जाता रहा है और राज्यों पर 6 से 10 हजार करोड़ रुपए का भार होता था, कोरोना काल को छोड़कर पूर्व में 365 दिनों में औसत 50 दिन का काम ही दिया जा सका है इसके बावजूद नई योजना में 125 दिन काम मिलने का सब्जबाग दिखाया जा रहा है,
छत्तीसगढ़ श्रमिक मंच के एड राजकुमार गुप्त ने मांग किया है कि मांगने पर काम के अधिकार और निर्णय लेने का ग्रामसभाओं का अधिकार वापस बहाल किया जाए, कम से कम 200 दिन का काम देने की गारंटी किया जाये, योजना में कृषि कार्य के लिए किसानों की मांग पर निर्धारित दर पर श्रमिक उपलब्ध कराया जाने का प्रावधान शामिल किया जाये।

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