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छत्तीसगढ़ के धर्म नगरी, डोंगरगढ़ में गौ मांस पकाते रंगे हाथों पकड़े गए दो आरोपी:  शासन-प्रशासन की नीयत पर लगा प्रश्न चिंह

सी. जी. प्रतिमान न्यूज :

डोंगरगढ़: छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले की धर्म नगरी डोंगरगढ़ एक बार फिर गौ माता से जुड़ी घटना को लेकर सुर्खियों में है। जहां कुछ ही दिनों पहले एक युवक के द्वारा गौ माता के साथ अनाचार का मामला सामने आया था, वहीं अब ताज़ा मामला खुले आम गौ मांस पकाए जाने का सामने आया है। बीती शाम हिन्दू संगठनों के कार्यकर्ताओं ने रेलवे स्टेशन के पास स्थित वाहन पार्किंग क्षेत्र में दो आरोपियों को गौ मांस पकाते हुए रंगे हाथों पकड़ लिया। हिंदू संगठन के कार्यकर्ताओं ने बताया कि उन्हें सूचना मिली थी कि कुछ अज्ञात लोग रेलवे स्टेशन के पास खुले आम गौ मांस पकाने का दुस्साहस कर रहे हैं।

सूचना मिलते ही बजरंग दल के नगर संयोजक रिषभ डकहा के नेतृत्व में कार्यकर्ता मौके पर पहुंचे, जहां दो युवक मौके से भागने लगे, लेकिन कार्यकर्ताओं ने पीछा कर दोनों को पकड़ लिया और पुलिस के हवाले कर दिया।सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार यह घटना किसी संयोग मात्र नहीं है, बल्कि डोंगरगढ़ में पिछले कई महीनों से लगातार गौ मांस की अवैध गतिविधियां चल रही हैं। सूत्र यह भी बताते हैं कि गौ माता की हत्या थाने से महज 200 मीटर की दूरी पर की जाती है। यह सवाल खड़ा करता है कि आखिर पुलिस की पेट्रोलिंग कहां हो रही है? स्थानीय लोगों और हिन्दू संगठनों में इस बात को लेकर भारी आक्रोश है कि जब धर्म नगरी डोंगरगढ़ में बार-बार गौ माता से जुड़ी घटनाएं हो रही हैं। 

चाहे वह गौ माता से अनाचार का मामला हो या गायों की हत्या का तो आखिर प्रशासन हाथ पर हाथ धरे क्यों बैठा है। लोगों का कहना है कि जब अपराधी खुलेआम गौ मांस पका सकते हैं, और पुलिस को इसकी भनक तक नहीं लगती, तो यह प्रशासन की विफलता का सबसे बड़ा उदाहरण है। सूत्र यहां तक बताते हैं कि डोंगरगढ़ में गौ वध का सिलसिला काफी समय से जारी है, लेकिन किसी भी स्तर पर ठोस कार्यवाही नहीं हो रही। प्रश्न उठता है कि क्या धर्म नगरी कहलाने वाले डोंगरगढ़ में अब कानून का डर खत्म हो गया है?क्या पुलिस प्रशासन केवल कागजों में गश्त करती है? क्या भाजपा सरकार के शासन में गौ माता की रक्षा के सारे दावे सिर्फ भाषणों तक सीमित रह गए हैं?

सूत्रों के आधार पर हिन्दू संगठनों ने आरोप लगाया है कि जब भी वे किसी आपराधिक कृत्य की सूचना पुलिस को देते हैं, तब पुलिस की लेटलतीफी और ढुलमुल रवैया साफ दिखाई देता है। यह स्थिति न केवल पुलिस की निष्क्रियता को उजागर करती है, बल्कि शासन-प्रशासन की नीयत पर भी सवाल खड़ा करती है। डोंगरगढ़ में अब जनता का धैर्य टूटने लगा है। लोग सवाल कर रहे हैं कि आखिर पुलिस प्रशासन और शासन कब तक ऐसे मामलों को नज़रअंदाज करता रहेगा?

डोंगरगढ़ बजरंग दल नगर संयोजक रिषभ ने कहा कि, ‘हमें सूचना मिली थी कि रेलवे स्टेशन के पास गौ मांस पकाया जा रहा है। हम मौके पर पहुंचे और आरोपियों को पकड़कर पुलिस के हवाले किया। लेकिन सवाल यह है कि पुलिस की गश्त कहां है? धर्म नगरी में गौ हत्या हो रही है और प्रशासन मौन क्यों है?’ लगातार बढ़ते ऐसे मामलों ने न केवल पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली पर बल्कि सरकार के “गौ रक्षा” के दावों पर भी बड़ा प्रश्नचिह्न लगा दिया है।

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