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खैरागढ़ जिले में प्रस्तावित श्री सीमेंट परियोजना को लेकर ग्रामीणों का विरोध , ले चुका है व्यापक आंदोलन का रूप 10 किलोमीटर के दायरे के 39 गाँवों ने एकमत होकर परियोजना का विरोध करते हुए जनसुनवाई रद्द करने की दोहराई है मांग।

खैरागढ़ 6 दिसंबर / जिले में प्रस्तावित श्री सीमेंट परियोजना को लेकर ग्रामीणों का विरोध अब भड़ककर व्यापक आंदोलन का रूप ले चुका है।

10 किलोमीटर के दायरे के 39 गाँवों ने एकमत होकर परियोजना का विरोध करते हुए जनसुनवाई रद्द करने की मांग दोहराई है। ग्रामीणों के तीखे तेवरों और आरोपों ने प्रशासन को कठघरे में खड़ा कर दिया है।
जिला प्रशासन की बैठक ग्रामीणों के गुस्से के बीच तनावपूर्ण माहौल में बीती। संडी, पंडारिया, विचारपुर, भरदागोड़ और अन्य गाँवों के प्रतिनिधियों ने ग्रामसभाओं के प्रस्ताव सामने रखकर कहा कि वे किसी भी कीमत पर चुना पत्थर खदान की अनुमति नहीं चाहते।


ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि प्रशासन खदान की गहराई, पर्यावरणीय प्रभाव और भूजल दोहन जैसे सवालों का कोई ठोस जवाब नहीं दे सका, जिसके चलते आक्रोश और गहराता गया।
बैठक की शुरुआत में ही किसानों ने साफ कह दिया कि यदि कंपनी के प्रतिनिधि मौजूद रहे तो वे बातचीत नहीं करेंगे। स्थिति बिगड़ती देख प्रशासन को कंपनी पक्ष को कमरे से बाहर भेजना पड़ा। इस दौरान ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि जनसुनवाई थोपने की कोशिश अंततः बड़े आंदोलन का कारण बनेगी।
बैठक में तब माहौल गरमा गया जब बुंदेली सरपंच के पिता नाथ्थू राम सोनी ने समर्थन पत्र को फर्जी बताते हुए गंभीर आरोप लगाए। ग्रामीणों ने दावा किया कि बुजुर्गों और नाबालिगों तक से धोखे से हस्ताक्षर करवाए गए। किसानों ने इस दस्तावेज को भ्रम फैलाकर समर्थन जुटाने की कोशिश बताते हुए निरस्त करने की मांग की।
स्थानीय विधायक यशोदा नीलाम्बर वर्मा ने कलेक्टर कार्यालय पहुँचकर ज्ञापन सौंपा और साफ कहा कि किसानों की आपत्ति के बावजूद जनसुनवाई आयोजित करना अनुचित है। उन्होंने मांग की कि ईआई रिपोर्ट हिंदी में उपलब्ध कराई जाए और तारीख बढ़ाई जाए, अन्यथा विरोध तेज किया जाएगा।
बैठक के बाद दनिया-अतरिया क्षेत्र के सरपंचों व ग्रामीणों ने पैदल मार्च कर थाना छुईखदान पहुँचकर फर्जी हस्ताक्षर कराने वालों के खिलाफ कार्रवाई का आवेदन सौंपा। थानेदार शक्ति सिंह ने जांच शुरू करने का आश्वासन दिया।
जिला साहू समाज ने भी किसानों के पक्ष में खुलकर समर्थन देते हुए कहा कि यह केवल किसानों का संघर्ष नहीं, बल्कि क्षेत्र की जनता का आंदोलन है। समाज ने जनसुनवाई रद्द करने की मांग को अपना आधिकारिक रुख बताया।
लगातार विरोध, जनप्रतिनिधियों की सक्रियता और फर्जी हस्ताक्षरों के आरोपों ने प्रशासन की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।

अब पूरा क्षेत्र 11 दिसंबर की प्रस्तावित जनसुनवाई को टकराव की घड़ी के रूप में देख रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि प्रशासन पीछे नहीं हटता तो बड़ा जनआंदोलन खड़ा होगा।
बैठक में पूर्व विधायक गिरवर जघेल, जनपद सभापति सुधीर गोलछा, डोमार सिंह, वरिष्ठ अधिवक्ता मोती लाल जंघेल, सूकरीता जंघेल, नेतराम जंघेल पूर्व मंडल अध्यक्ष, हीरा जंघेल, श्रवण जंघेल, लुकेश्वरी जंघेल, मुकेश पटेल, कामदेव वर्मा, शक्ति केंद्र प्रभारी अशोक जंघेल, वीरेंद्र जंघेल विचारपुर, प्रमोद सिंह, गोकुल चंदेल, सरपंच ग्राम पंचायत पंडरिया, विचारपुर, संडी, भरदा गौड़, कुकुरमुड़ा, खैरबना, दनिया, जोम, उदान, जंगलपुर, जगमड़वा आदि सहित 39 गांव के किसान और प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

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