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मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा में जहरीली कफ सिरप से 10 बच्चों की मौत, डॉक्टर गिरफ्तार

सी. जी. प्रतिमान न्यूज :

छिंदवाड़ा 5 अक्टूबर : मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले में कोल्ड्रिफ कफ सिरप पीने से 10 मासूम बच्चों की मौत ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है। जांच के बाद सामने आए तथ्यों के आधार पर शनिवार देर रात परासिया में तैनात डॉक्टर प्रवीण सोनी को गिरफ्तार कर लिया गया। आरोप है कि उन्हीं की ओर से अधिकांश पीड़ित बच्चों को कोल्ड्रिफ सिरप लिखी गई थी, जिसके सेवन से बच्चों की हालत बिगड़ी और मौत हो गई।

गंभीर धाराओं में FIR, दवा कंपनी पर भी कार्रवाई

डॉ. सोनी और कफ सिरप बनाने वाली कंपनी श्रीसन फार्मास्युटिकल्स के खिलाफ परासिया सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर डॉ. अंकित साहलम की शिकायत पर प्राथमिकी दर्ज की गई है। उन पर औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम की धारा 27(ए) और भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 105 और 276 के तहत केस दर्ज किया गया है।

लैब रिपोर्ट में खुलासा: 48.6% डायथिलीन ग्लाइकॉल मौजूद

शुरुआती जांच में यह संदेह जताया गया था कि बच्चों की मौत सिरप के कारण हुई। शुक्रवार को आई लैब रिपोर्ट ने इस संदेह को पुख्ता कर दिया। रिपोर्ट में सामने आया कि कोल्ड्रिफ सिरप में 48.6% डायथिलीन ग्लाइकॉल (DEG) पाया गया — यह एक जहरीला रसायन है जो किडनी फेलियर और मृत्यु का कारण बन सकता है।

सिरप पर तत्काल प्रतिबंध, सभी जिलों में कार्रवाई

जैसे ही रिपोर्ट सामने आई, मध्य प्रदेश सरकार ने कोल्ड्रिफ सिरप की बिक्री, वितरण और भंडारण पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया। औषधि नियंत्रक विभाग ने राज्य के सभी जिलों को निर्देश दिए कि इस सिरप और श्रीसन फार्मास्युटिकल्स के अन्य उत्पादों को जब्त कर सील किया जाए।

कंपनी पहले से जांच के घेरे में, अन्य राज्यों में भी मौतें

कोल्ड्रिफ सिरप का निर्माण तमिलनाडु के कांचीपुरम स्थित श्रीसन फार्मास्युटिकल्स द्वारा किया गया है। यह कंपनी पहले से ही तमिलनाडु के औषधि नियंत्रण निदेशालय के रडार पर है। 2 अक्टूबर को जारी एक रिपोर्ट में इस सिरप के बैच को “अमानक और दोषपूर्ण (NSQ)” घोषित किया गया था। रिपोर्ट में स्पष्ट कहा गया कि यह सिरप मानव उपभोग के लिए असुरक्षित है। इस कंपनी पर मध्य प्रदेश में 9, महाराष्ट्र में 2 और राजस्थान में 1 बच्चे की मौत का आरोप पहले से दर्ज है।

सरकार की सख्ती: उच्च स्तरीय जांच के आदेश

प्रदेश सरकार ने इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच के आदेश दे दिए हैं। जांच दल यह पता लगा रहा है कि सिरप में DEG जैसे घातक रसायन कैसे पहुंचे और गुणवत्ता नियंत्रण प्रणाली में इतनी बड़ी चूक कैसे हुई। सरकार ने सख्त रुख अपनाते हुए कहा है कि किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा और दोषियों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी


 

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