
सी.जी. प्रतिमान न्यूज़ : जामुल / डाँक्टर मनराखन लाल साहू शासकीय महाविद्यालय जामुल में स्नातक तृतीय वर्ष की छात्र-छात्राओं हेतु केयर गाइडेंस कार्यक्रम आयोजित की गई, यह कार्यक्रम महाविद्यालय के केरियर काउंसलिंग सेल के तत्वाधान में आयोजित किया गया l इस कार्यक्रम में बीए बीएससी एवं बीकॉम तृतीय वर्ष के छात्र-छात्राओं ने भाग लिया ।कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में महाविद्यालय के राजनीति विज्ञान के सहायक अध्यापक बलराज ताम्रकार ने यूपीएससी, पीएससी, एसएससी, रेलवे रिक्रूटमेंट बोर्ड, व्यापम , आईबीपीएस इत्यादि के द्वारा आयोजित की जाने वाली विभिन्न पदों की भर्ती हेतु परीक्षाओं की न्यूनतम योग्यता, सिलेबस एवं परीक्षा प्रणाली पर बच्चों को विस्तार पूर्वक जानकारी प्रदान की। स्नातक के बाद कामकाजी स्टूडेंट जो काम करते हुए भी पढ़ाई करना चाहते हैं उनको सुविधाजनक रूप से पढ़ाई को जारी रखने के लिए पंडित सुंदरलाल शर्मा मुक्त विश्वविद्यालय एवं इग्नू में संचालित विभिन्न कोर्सेस के बारे में जानकारी प्रदान की । जिससे बच्चे रोजगार के साथ-साथ पढ़ाई भी करते रहेंगे। श्री ताम्रकार ने बताया की प्रतियोगी परीक्षाओं में छात्रों को उत्तीर्ण होने के लिए नहीं बल्कि मेरिट लिस्ट में आने के लिए पुरजोर तैयारी करनी होती है। प्रतियोगी परीक्षाओं हेतु मानसिक रूप से हम किस तरह तैयार रहें ? इस पर बच्चों से चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि सफलता रातों-रात नहीं मिलती है।

इसके लिए हमें लगातार कई वर्षों तक बिना रुके, बिना हर बिना थके ,तैयारी की आवश्यकता पड़ती है। हमें कई असफलताओं का सामना करना पड़ता है, मोहल्ले वालों और रिश्तेदारों की आलोचनाओं का सामना करना पड़ता है। इन्हीं असफलताओं और आलोचनाओं से आपको घबराना नहीं है।लोगों की आलोचनाओं से बिना घबूराए लगातार हम तैयारी करें तो एक दिन निश्चित रूप से हमें सफलता प्राप्त होती है।

इस प्रकार से श्री ताम्रकार ने छात्रों को प्रतियोगी परीक्षाओं हेतु नियोजित एवं सतत प्रयास अनुशासित जीवन शैली,धैर्य मानसिक दृढ़ता एवं प्रामाणिक पुस्तकों के अध्ययन करने एवं विगत वर्षों के प्रश्नपत्रो का विश्लेषण करने विशेष बल देने बात कही। कार्यक्रम के अंत में बच्चों का प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े मन में उठने वाले संशय एवं प्रश्नों का उत्तर भी दिया गया। कार्यक्रम में प्राध्यापक गण डॉक्टर शशि कश्यप, गजेंद्र कुमार कश्यप ,डॉक्टर संजय परगनिहा ,डॉक्टर रचना चौधरी, डॉ भावना माहुले एवं डॉ रमेश कुमार मेश्राम एवं विद्यार्थियों की भागीदारी रही।








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