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सी बी एस ई 2026 : 12 वीं कक्षा की अब ऑनलाइन होगी उत्तरपुस्तिकाओं की जांच, स्कैन कॉपी पर देंगे शिक्षक अंक…

सी बी एस ई 2026: 12 वीं कक्षा की अब ऑनलाइन होगी उत्तरपुस्तिकाओं की जांच, स्कैन कॉपी पर देंगे शिक्षक अंक…

रायपुर 3 फरवरी / केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने बोर्ड परीक्षाओं की मूल्यांकन प्रक्रिया को आधुनिक बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। कक्षा 12वीं की बोर्ड परीक्षा से उत्तरपुस्तिकाओं की जांच अब पारंपरिक तरीके से नहीं, बल्कि On Screen Marking System (OSMS) के जरिए की जाएगी। इस नई व्यवस्था के तहत छात्रों की उत्तरपुस्तिकाएं स्कैन कर डिजिटल फॉर्मेट में परीक्षकों को उपलब्ध कराई जाएंगी।

क्या है ऑन स्क्रीन मार्किंग सिस्टम?

इस प्रणाली में उत्तरपुस्तिकाओं को हाई-क्वालिटी स्कैन कर एक सुरक्षित डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अपलोड किया जाएगा। परीक्षक कंप्यूटर या लैपटॉप की स्क्रीन पर उत्तर देखकर वहीं अंक प्रदान करेंगे। पूरी जांच प्रक्रिया CBSE की निर्धारित मार्किंग स्कीम के अनुसार होगी, जिससे मूल्यांकन में एकरूपता बनी रहे।

तेज, पारदर्शी और भरोसेमंद मूल्यांकन:

CBSE के अनुसार, डिजिटल जांच से कॉपियों के ट्रांसपोर्ट की जरूरत खत्म होगी मूल्यांकन प्रक्रिया में समय की बचत होगी। परिणाम पहले की तुलना में जल्दी घोषित हो सकेंगे। मानवीय भूल की संभावना काफी हद तक कम होगी। पूरी जांच प्रक्रिया डिजिटल रिकॉर्ड में सुरक्षित रहेगी, जिससे पारदर्शिता और जवाबदेही दोनों बढ़ेंगी।

छात्रों को मिलेगा सही प्रयास का पूरा लाभ:

नई प्रणाली में परीक्षक उत्तर के स्टेप्स, लॉजिक और जरूरी शब्दों के आधार पर अंक देंगे। इससे उन छात्रों को फायदा होगा जिन्होंने उत्तर सही प्रक्रिया के साथ लिखा है, भले ही अंतिम उत्तर में हल्का अंतर क्यों न हो। जरूरत पड़ने पर उत्तरपुस्तिका को तुरंत दोबारा जांचा या किसी अन्य परीक्षक से क्रॉस-चेक कराया जा सकेगा।

पुनर्मूल्यांकन होगा आसान:

ऑन स्क्रीन सिस्टम के चलते मॉडरेशन और क्रॉस-वेरिफिकेशन में कम समय लगेगा। एक ही उत्तर पर अलग-अलग अंक मिलने की समस्या घटेगी, और  छात्रों के साथ किसी भी तरह के अन्याय की पहचान तुरंत हो सकेगी।

आगे कक्षा 10वीं में भी लागू हो सकती है व्यवस्था:

CBSE ने संकेत दिया है कि यदि कक्षा 12वीं में यह डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली सफल रहती है, तो आने वाले सत्रों में इसे कक्षा 10वीं बोर्ड परीक्षा में भी लागू किया जा सकता है। इससे पूरे बोर्ड सिस्टम में एक समान और आधुनिक जांच प्रक्रिया अपनाई जा सकेगी।

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