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बस्तर में नक्सलवाद अब लगभग समाप्त, औपचारिकता शेष….लोकसभा में अमित शाह का बड़ा बयान : बोले- लाल आतंक हटते ही विकास पहुंचा

गृहमंत्री ने कहा- जो देश के खिलाफ हथियार उठाएगा, उसे खत्म किया जाएगा; बस्तर के आदिवासियों के विकास पर कांग्रेस को घेरा

नई दिल्ली। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोमवार 30 मार्च को लोकसभा में नक्सलवाद पर चर्चा के दौरान बड़ा बयान देते हुए कहा कि बस्तर में नक्सलवाद अब लगभग समाप्त हो चुका है और लाल आतंक की परछाई हटते ही विकास वहां तेजी से पहुंच रहा है।

लोकसभा में बोलते हुए अमित शाह ने कहा कि बस्तर वर्षों तक लाल आतंक की चपेट में रहा, जिसकी वजह से वहां विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य, बैंकिंग और बुनियादी सुविधाएं नहीं पहुंच पाईं। उन्होंने कहा कि अब जब नक्सल प्रभाव कमजोर हुआ है, तो बस्तर में विकास का नया दौर शुरू हो गया है।

“लाल आतंक हट गया, अब बस्तर विकसित हो रहा”

गृह मंत्री शाह ने कहा कि“बस्तर वाले लाल आतंक की वजह से छूट गए थे। लाल आतंक की परछाई वहां से हट गई है, अब बस्तर विकसित हो रहा है।”उन्होंने कहा कि वर्षों तक नक्सल प्रभाव वाले क्षेत्रों में सड़क, स्कूल, अस्पताल, राशन, बैंकिंग और सरकारी योजनाओं की पहुंच बाधित रही, लेकिन अब केंद्र और राज्य सरकार की संयुक्त रणनीति से हालात तेजी से बदल रहे हैं।

आदिवासियों के विकास पर कांग्रेस को घेरा

अमित शाह ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि“75 साल में 60 साल कांग्रेस ने शासन किया, फिर आदिवासी विकास से क्यों अछूता रहा?”उन्होंने कहा कि कांग्रेस आज आदिवासियों के विकास पर सवाल उठा रही है, जबकि लंबे समय तक सत्ता में रहने के बावजूद आदिवासी इलाकों में घर, पानी, शिक्षा, स्वास्थ्य और बैंकिंग जैसी बुनियादी सुविधाएं नहीं पहुंचा पाई।शाह ने कहा कि आज जब आधार कार्ड, घर, गैस कनेक्शन, मुफ्त राशन, स्वास्थ्य बीमा और बैंकिंग सेवाएं बस्तर तक पहुंच रही हैं, तब विपक्ष सवाल खड़ा कर रहा है।

“पूरी व्यवस्था को नकारकर हथियार उठाना स्वीकार नहीं”

लोकसभा में अपने भाषण के दौरान अमित शाह ने नक्सलवाद की विचारधारा पर भी हमला बोला। उन्होंने कहा कि“पूरी व्यवस्था को नकारकर हथियार उठा लेना, यह किसी भी हाल में स्वीकार नहीं किया जा सकता।”उन्होंने स्पष्ट कहा कि“जो देश के खिलाफ हथियार उठाएगा, उसे खत्म किया जाएगा।”गृह मंत्री ने कहा कि लोकतंत्र में अपनी बात रखने के अनेक संवैधानिक रास्ते मौजूद हैं, लेकिन हिंसा और बंदूक के बल पर सत्ता हासिल करने की सोच भारत के लोकतांत्रिक ढांचे के खिलाफ है।

“इनकी विचारधारा का ध्रुव वाक्य है- सत्ता बंदूक की नली से निकलती है”

अमित शाह ने नक्सल विचारधारा पर हमला करते हुए कहा कि भारत ने आजादी के बाद “सत्यमेव जयते” को अपना आदर्श माना, जबकि नक्सल विचारधारा का आधार “सत्ता बंदूक की नली से निकलती है” जैसा हिंसक दृष्टिकोण है।

उन्होंने कहा कि यह विचारधारा भोले-भाले आदिवासियों को बरगलाकर उन्हें मुख्यधारा से दूर ले गई।शाह ने आरोप लगाया कि नक्सलियों ने आदिवासी क्षेत्रों में लोगों को पढ़ने नहीं दिया, स्कूल नहीं जाने दिया और इलाज तक नहीं पहुंचने दिया।

“बस्तर को ही क्यों चुना गया?”

गृह मंत्री ने अपने संबोधन में सवाल उठाया कि“माओवादियों ने बस्तर को ही क्यों चुना?”उन्होंने कहा कि वामपंथी उग्रवादियों ने एक ऐसे क्षेत्र को चुना, जहां गरीबी, दूरस्थ भौगोलिक स्थिति और भोले आदिवासी समाज का फायदा उठाया जा सके।

शाह ने कहा कि बस्तर के युवाओं से संवाद के दौरान भी यह सवाल सामने आया कि आखिर नक्सलियों ने बस्तर को ही अपनी जमीन क्यों बनाया।

सुरक्षाबलों और स्थानीय जनता को दिया श्रेय: अमित शाह ने कहा कि नक्सलवाद के खिलाफ चल रही लड़ाई में CAF, CRPF, छत्तीसगढ़ पुलिस और स्थानीय जनता की भूमिका बेहद अहम रही है।

उन्होंने कहा कि“अगर जनता का सहयोग नहीं होता, तो यह संभव नहीं हो पाता।”सदन में उन्होंने शहीद जवानों, हजारों युवाओं और सुरक्षाबलों को श्रद्धांजलि भी दी और कहा कि नक्सलवाद के खिलाफ यह लड़ाई बलिदान, रणनीति और जनसहयोग से आगे बढ़ी है।

“12 साल में देश में बड़े बदलाव हुए”

अपने भाषण के दौरान अमित शाह ने केंद्र सरकार के पिछले 12 वर्षों के कामकाज का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इस दौरान देश में कई बड़े फैसले हुए, जिनमें—धारा 370 और 35A का हटनाराम जन्मभूमि पर भव्य मंदिर निर्माणCAA कानूनमहिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षणजैसे निर्णय शामिल हैं। उन्होंने कहा कि“नक्सलमुक्त भारत की दिशा में हुई प्रगति भी इसी दौर की बड़ी उपलब्धि है।”

बस्तर को लेकर सियासी बहस तेज: लोकसभा में अमित शाह के इस बयान के बाद बस्तर, नक्सलवाद और आदिवासी विकास को लेकर राजनीतिक बहस और तेज हो गई है।

जहां केंद्र सरकार इसे सुरक्षा और विकास मॉडल की सफलता बता रही है, वहीं विपक्ष इस मुद्दे पर सरकार के दावों की जमीनी सच्चाई पर सवाल उठा सकता है।लेकिन शाह का यह बयान साफ संकेत देता है कि केंद्र सरकार अब “नक्सलवाद के अंत” को राजनीतिक और प्रशासनिक उपलब्धि के रूप में भी सामने रख रही है।

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