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बजट सत्र के दौरान सोमवार को लोकसभा में उस समय तीखी बहस से संसद में पूर्व आर्मी चीफ नरवणे की अप्रकाशित किताब पर गरमाई सियासत, जानिए वजह…

नई दिल्ली 2 फरवरी / बजट सत्र के दौरान सोमवार को लोकसभा में उस समय तीखी बहस देखने को मिली, जब नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने पूर्व थलसेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे की अप्रकाशित किताब ‘Four Stars of Destiny’ का जिक्र किया। राहुल गांधी ने एक मैगजीन में प्रकाशित कथित लीक अंशों के आधार पर सरकार पर सवाल उठाए, जिसके बाद सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने आ गए। यह विवाद केवल राजनीतिक बयानबाज़ी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा, सैन्य परंपराओं और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता जैसे संवेदनशील मुद्दों तक जा पहुंचा।

चीन सीमा विवाद बना विवाद की जड़:

राहुल गांधी ने अपने भाषण में किताब के उस कथित हिस्से का हवाला दिया, जिसमें भारत-चीन सीमा तनाव के दौरान की घटनाओं का उल्लेख बताया गया है। खास तौर पर वर्ष 2020 के तनाव के समय रेचिन ला इलाके में भारतीय और चीनी टैंकों के आमने-सामने आने की घटना चर्चा में है। सरकारी पक्ष का कहना है कि इस तरह की जानकारियां सार्वजनिक होने से सैन्य रणनीति और कूटनीतिक संतुलन प्रभावित हो सकता है।

क्यों रुका किताब का प्रकाशन ?

स्पष्ट किया गया है कि Four Stars of Destiny पर किसी भी अदालत ने प्रतिबंध नहीं लगाया है। हालांकि, 2024 की शुरुआत में प्रस्तावित रिलीज से ठीक पहले रक्षा मंत्रालय और भारतीय सेना ने पांडुलिपि की समीक्षा का निर्णय लिया, जिसके चलते प्रकाशन फिलहाल रोक दिया गया। सरकार का तर्क है कि किताब में राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी संवेदनशील जानकारियां होने की आशंका है, जिनकी जांच जरूरी है।

क्या हैं राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर आपत्तियां:

रिपोर्ट्स के अनुसार, किताब में सैन्य निर्णय-प्रक्रिया, ऑपरेशनल हालात और उच्चस्तरीय चर्चाओं का उल्लेख है। विशेष रूप से सीमा विवाद के दौरान लिए गए फैसलों और तैनाती से जुड़ी बातें सैन्य परंपराओं के लिहाज से असामान्य मानी जा रही हैं। यही वजह है कि सेना ने इसे सार्वजनिक करने से पहले गहन समीक्षा आवश्यक बताई है।

अग्निपथ योजना पर खुलासों से बढ़ी बेचैनी:

किताब के कथित लीक अंशों में अग्निपथ भर्ती योजना को लेकर भी अहम खुलासे बताए जा रहे हैं। जनरल नरवणे के हवाले से लिखा गया है कि यह योजना नौसेना और वायुसेना के लिए पूरी तरह अप्रत्याशित थी। इसके अलावा, सेना की ‘टूर ऑफ ड्यूटी’ योजना को सीमित प्रयोग के रूप में देखने की बात भी सामने आई, जो नीति-निर्माण से जुड़े हलकों में असहजता का कारण बनी।

इस नियम के तहत रोकी गई किताब:

सरकार ने Central Civil Services (Pension) Amendment Rules, 2021 का हवाला दिया है। इन नियमों के अनुसार, सेवानिवृत्त सैन्य अधिकारी अपने सेवा-काल से जुड़ी किसी भी सामग्री को पूर्व अनुमति (NOC) के बिना प्रकाशित नहीं कर सकते। बताया गया है कि पांडुलिपि पब्लिशर तक पहुंचने से पहले यह औपचारिक अनुमति नहीं ली गई थी।

जनरल नरवणे ने क्या कहा?

किताब की समीक्षा में हो रही देरी पर जनरल एमएम नरवणे ने पहले हल्के-फुल्के अंदाज में टिप्पणी करते हुए कहा था कि “मेरी किताब पुरानी शराब की तरह परिपक्व हो रही है, जितनी देर लगेगी उतनी ही कीमती बनेगी।” अक्टूबर में उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि किताब लिखना उनका काम था, जबकि जरूरी अनुमति लेना पब्लिशर की जिम्मेदारी थी।

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