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धान खरीदी केंद्रों में अनुभवहीन अधिकारियों की तैनाती से गहराया KCC लोन भुगतान संकट- ढालेश साहू

धान खरीदी केंद्रों में अनुभवहीन अधिकारियों की तैनाती पर किसान नेता का आरोप:

(अनुभवी कर्मचारियों को हटाने से उपार्जन व्यवस्था अस्थिर—तौल, एंट्री, भुगतान में त्रुटियों से किसानों के KCC खातों पर NPA का खतरा मंडराया)

रायपुर / राज्य सरकार द्वारा खरीफ विपणन वर्ष के अति-संवेदनशील दौर में धान खरीदी व्यवस्था में किए गए व्यापक प्रशासनिक फेरबदल, जिसके तहत अनुभवी कर्मचारियों को हटाकर गैर-कृषि पृष्ठभूमि वाले अधिकारियों को नियुक्त किया गया है, जिससे किसानों के बीच गंभीर वित्तीय संकट की आशंका पैदा कर दी है।

किसान संगठनो ने चेतावनी दी है कि अनुभवहीनता के कारण धान उपार्जन प्रणाली में होने वाली त्रुटियाँ सीधे किसानों की आर्थिक रीढ़ KCC (किसान क्रेडिट कार्ड) लोन भुगतान को प्रभावित करेंगी, जिससे हजारों किसानों के खातों पर NPA (Non-Performing Asset) का खतरा मंडरा रहा है।
छत्तीसगढ़ में इसवर्ष 150-160 लाख मीट्रिक टन धान की खरीदी किये जाने का अनुमान है, और यह प्रक्रिया तकनीकी सटीकता और समयबद्धता की मांग करती है।

दोहरी संकट -तकनीकी त्रुटियाँ और वित्तीय जोखिम
किसान संगठनों का कहना है कि अनुभवी कर्मचारियों के हटने से दोहरे खतरे उत्पन्न हो गए हैं:

1. खरीदी केंद्र पर तकनीकी और परिचालन त्रुटियाँ

  • FAQ गुणवत्ता जांच में चूक: अनुभवहीन कर्मियों के कारण नमी, टूटे दाने या अशुद्धियों का गलत आकलन होगा, जिससे किसानों के धान में अनावश्यक और मनमानी कटौती की जाएगी।
  • तौल और पोर्टल एंट्री की गलती: इलेक्ट्रॉनिक तौल मशीनों और उपार्जन पोर्टल (CG-MSP/Cooperative Portal) के संचालन में अनुभव की कमी से गलत वजन, गलत ऑनलाइन एंट्री, या त्रुटिपूर्ण रसीदें जारी होने की आशंका है। एक भी गलत एंट्री होने पर किसान का भुगतान फंस सकता है।
  • भीड़ और अराजकता: जमीनी व्यवस्था का ज्ञान न होने से खरीदी केंद्रों पर भीड़, अव्यवस्था, और तुलाई में भारी देरी होगी।

2. KCC लोन भुगतान पर सीधा खतरा

  • धान खरीदी के बाद किसानों को मिलने वाले भुगतान से ही लाखों KCC खातों का समायोजन (Adjustment) किया जाता है। यह कार्य अत्यंत जटिल और तकनीकी होता है।
  • देरी से भुगतान: खरीदी केंद्र पर अव्यवस्था या पोर्टल में गलत एंट्री के कारण किसान के बैंक खाते में भुगतान देरी से पहुँचेगा।
  • NPA का खतरा: यदि भुगतान KCC की नियत तारीख तक नहीं पहुँचता है, तो किसान ब्याज सब्सिडी (3% की छूट) से वंचित हो जाएंगे, और उनका खाता NPA घोषित हो सकता है। गलत समायोजन: अनुभवहीन अधिकारियों द्वारा किए गए गलत एडजस्टमेंट के कारण KCC की बकाया राशि गलत तरीके से अधिक दिख सकती है, जिससे किसान अगले वर्ष नया लोन या सरकारी लाभ लेने से वंचित हो सकते हैं।


किसान नेता एवं जनपद पंचायत सदस्य दुर्ग ढालेश साहू का आरोप है कि धान खरीदी कोई प्रशासनिक प्रयोग का मैदान नहीं है। यह लाखों किसानों की वित्तीय स्थिरता और KCC बैंकिंग व्यवस्था से जुड़ा मामला है। एक गलत एंट्री या एक दिन की भुगतान देरी से किसान पर NPA का ठप्पा लग सकता है, जिससे उसकी पूरी कृषि अर्थव्यवस्था चौपट हो जाएगी।
“हम सरकार से मांग करते हैं कि धान खरीदी के संवेदनशील कार्य में अनुभवी कर्मचारियों की तत्काल पुनर्वापसी सुनिश्चित की जाए। यदि सरकार ने जानबूझकर उत्पन्न की गई इस अव्यवस्था पर तुरंत कार्रवाई नहीं की, और यदि एक भी किसान का KCC खाता गलत समायोजन या देरी के कारण NPA होता है, तो किसान व्यापक और उग्र आंदोलन करने को मजबूर होंगे।”

किसानों की प्रमुख मांगें

  • धान खरीदी केंद्रों में अनुभवी कर्मचारियों की तत्काल पुनर्वापसी। KCC भुगतान समायोजन में त्रुटियों से बचने हेतु विशेष बैंकिंग सहायता डेस्क स्थापित की जाए।
  • खरीदी, FAQ जांच और पोर्टल संचालन के लिए विशेष तकनीकी दल की नियुक्ति। पारदर्शिता और निगरानी के लिए जिला स्तरीय मॉनिटरिंग सेल का गठन।
    किसानों ने स्पष्ट किया है कि सरकार को तत्काल हस्तक्षेप कर स्थिति सुधारनी चाहिए, ताकि खरीदी सुचारू, पारदर्शी और किसानों के हितों के अनुरूप संचालित हो सके।
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