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ब्रेकिंग न्यूज : रायपुर प्रदेश में आवारा कुत्तों के प्रबंधन और जानकारी स्थानीय निकाय को देने के लिए अब शिक्षकों की लगाई ड्यूटी..

रायपुर 21 नवंबर /  छत्तीसगढ़ के रायपुर प्रदेश में आवारा कुत्तों के प्रबंधन और जानकारी स्थानीय निकाय को देने के लिए अब शिक्षकों की ड्यूटी लगाई गई है। संचालक लोक शिक्षण संचालनालय ने इस संबंध में सभी संयुक्त संचालक और जिला शिक्षा अधिकारी को आदेश जारी किया है। हालांकि शिक्षकों के संघों ने आदेश का विरोध करते हुए इसे मनमाना बताया है।

शिक्षकों पर आवारा कुत्तों की निगरानी का नया ‘गैरशिक्षकीय’ बोझ

दरअसल आवारा कुत्तों की जानकारी देने के लिए स्कूलों के प्रमुखों को नोडल अधिकारी बनाया गया है। आदेश में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दिए गए आदेश की समीक्षा का हवाला दिया गया है। संचालनालय के आदेश के तहत शाला के प्राचार्य या संस्था प्रमुख शाला परिसर के आस-पास विचरण कर रहे आवारा कुत्तों की सूचना, ग्राम पंचायत या जनपद पंचायत या निगम के डॉग कैचर नोडल अधिकारी को देंगे।

वहीं, शाला प्रमुख सभी निकायों के सहयोग से शाला में आवारा कुत्तों के प्रवेश की रोकथाम हेतु आवश्यक प्रबंध करेंगे। अगर आवारा कुत्ता काट दे तो बच्चे को उपचार हेतु निकट के स्वास्थ्य केंद्र में पहुंचाएं।

आदेश से बढ़ेगा काम का दबाव

छत्तीसगढ़ शिक्षक संघ नरेंद्र सिंह ने कहा की प्रदेश में मुख्यमंत्री शिक्षा गुणवत्ता वर्ष मनाया जा रहा है। गुरुवार को ही शिक्षा मंत्री ने शिक्षकों से ग़ैरशिक्षकीय कार्य नहीं कराने के संबंध में मीडिया से चर्चा की थी। वहीं, लोक शिक्षण संचालनालय आवारा कुत्तों की जानकारी देने की ड्यूटी लगा रहा है।

यह आदेश बताता है कि उच्चाधिकारी सरकार को सही तरीके से ब्रीफ नहीं कर रहे हैं। शिक्षक भारी मानसिक दबाव में कार्य कर रहे हैं। उन पर 34 से अधिक सरकारी ऐप का बोझ है। वर्तमान में मतदाता सूची एसआईआर का दबाव है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश की तामीली पंचायत विभाग या दूसरे स्थानीय अमले के माध्यम से भी कराई जा सकती है।

छत्तीसगढ़ विद्यालय शिक्षक कर्मचारी संघ प्रांताध्यक्ष संजय तिवारी ने कहा की सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्तों के प्रबंधन के लिए प्राचार्य, प्रधान पाठकों अथवा शिक्षकों को नहीं कहा है। यह कार्य स्थानीय पंचायत एवं निकायों का है, कोर्ट की आड़ में स्कूल शिक्षा विभाग आपत्तिजनक कार्य हमसे करवा रहा। हम इसका घोर विरोध करेंगे।

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