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राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने अंबिकापुर में जनजातीय गौरव दिवस का किया शुभारंभ, कई जनजातीय योजनाएं कीं लॉन्च

सीजी प्रतिमान न्यूज़:

अंबिकापुर 20 नवंबर / राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू एक दिवसीय छत्तीसगढ़ प्रवास पर हैं। इस दौरान वे अंबिकापुर में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने दीप प्रज्ज्वलित कर जनजातीय गौरव दिवस कार्यक्रम की शुरुआत की। बिरसा मुंडा जयंती के अवसर पर आयोजित इस विशेष कार्यक्रम में उन्होंने जनजातीय समाज की संस्कृति, परंपराओं और सम्मान को सुदृढ़ करने वाली कई महत्त्वपूर्ण योजनाओं का शुभारंभ किया। यह पिछले आठ महीनों में उनका छत्तीसगढ़ का दूसरा दौरा है।

राष्ट्रपति मुर्मू ने इस अवसर पर पारंपरिक उपचार पद्धति से जुड़े वैद्यों के लिए तैयार की गई नई योजना का उद्घाटन किया। इसके साथ ही प्रदेश के विभिन्न जनजातीय देवस्थलों के संरक्षण और विकास से संबंधित परियोजनाओं को भी हरी झंडी दी। कार्यक्रम के दौरान उन्होंने 70 वर्ष पहले प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद द्वारा गोद में उठाए गए ‘बसंत पंडो’ से मुलाकात का भी समय निर्धारित किया है, जिनकी उम्र अब 80 वर्ष हो चुकी है।

अंबिकापुर के पीजी कॉलेज मैदान में आयोजित समारोह में बड़ी संख्या में लोग उपस्थित रहे। इस आयोजन में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्री जुएल ओरांव, राज्यमंत्री दुर्गा दास उइके और तोखन साहू सहित कई जनप्रतिनिधि भी शामिल हुए। इससे पहले राष्ट्रपति मुर्मू रायपुर में विधानसभा के रजत जयंती समारोह में सम्मिलित हुई थीं।

दो दिवसीय जनजातीय गौरव दिवस के पहले दिन प्रदेश स्तरीय जनजातीय लोक नृत्य महोत्सव का आयोजन भी किया गया। इस मौके पर विभिन्न क्षेत्रों से आए नर्तक दलों ने पारंपरिक लोकनृत्यों की आकर्षक प्रस्तुतियाँ दीं। प्रतियोगिता में चयनित दलों को आगामी कार्यक्रम में राष्ट्रपति मुर्मू के हाथों सम्मानित किया जाएगा।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू सरगुजा क्षेत्र का दौरा करने वाली देश की दूसरी राष्ट्रपति बन गई हैं। इससे पहले वर्ष 1952 में प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद यहां आए थे। उनके सरगुजा प्रवास के ऐतिहासिक प्रसंग को याद करते हुए राष्ट्रपति मुर्मू आज उसी बसंत पंडो से मुलाकात करेंगी, जिन्हें डॉ. प्रसाद ने बचपन में गोद में उठाया था और प्यार से ‘बसंत’ नाम दिया था।

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