जामुल / डॉ. मनराखन लाल साहू शासकीय महाविद्यालय जामुल भिलाई में 4 नवंबर मंगलवार को भारतीय ज्ञान परंपरा विषय पर अतिथि व्याख्यान का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में श्री शंकराचार्य महाविद्यालय जुनवानी भिलाई की जंतु विज्ञान की सहायक प्राध्यापक एवं विभागाध्यक्ष डॉ. सोनिया बजाज रही।
कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती की पूजा अर्चना से प्रारंभ हुआ। इसके पश्चात डॉ. बजाज ने भारतीय ज्ञान परंपरा विषय पर अपना व्याख्यान देते हुए बताया कि आज के इस आधुनिक और प्रतियोगी की युग में इसका क्या महत्व है, उन्होंने बताया कि कैसे हमारी परंपराएं जिनमें भारतीय दर्शन, आयुर्वेद, योग, आध्यात्मिक शिक्षा, शैक्षणिक परंपरा, वैदिक परंपरा, नैतिकता, साहित्य कला व संगीत, वेद, उपनिषद, धर्म-कर्म व पुरुषार्थ, ब्रह्मचर्य का आचरण, वैज्ञानिक व गणितीय परंपरा, आदि के बारे में विस्तार से बताया तथा कहा कि यह कैसे इस आधुनिकता युग में हमें संयमित व्यवहार वह निर्णय लेना सिखाती है जिसके आधार पर हम अपने जीवन के लक्ष्यों को प्राप्त कर सकें। उन्होंने अपने व्याख्यान में बताया कि यह परंपरा कोई नई नहीं है यह हमारी अपनी परंपरा है जिसे संजोय रखना हमारा नैतिक कर्तव्य और जिम्मेदारी है ताकि आने वाली पीढ़ी भी अपने जीवन में इसे आत्मसात कर सके।

इसके पश्चात महाविद्यालय की प्रभारी प्राचार्य डॉ. शशि कश्यप ने छात्र-छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा को यूजीसी के तहत उच्च शिक्षा के क्षेत्र में क्यों जोड़ा गया तथा छात्र-छात्राओं को इसके लाभ से अवगत कराया। आपके जीवन को सरल और सहज बनाने में यह कैसे कारगर सिद्ध होगा।
कार्यक्रम के अंत में वनस्पति विज्ञान की विभागाध्यक्ष डॉ. रचना चौधरी ने कार्यक्रम की मुख्य वक्ता डॉ. सोनिया बजाज, प्रभारी प्राचार्य डॉ शशि कश्यप, समस्त प्राध्यापक गण एवं छात्र-छात्राओं का आभार प्रदर्शन किया।
इस कार्यक्रम में महाविद्यालय के प्राध्यापक बलराज ताम्रकार, डॉ. रमेश मेश्राम डॉ. संजय परगनिहा, श्रीमती विनिता परगनिहा, पी हेमा राव, श्रीमती अंजू माला साहू एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। कार्यक्रम का सफल संचालन गजेंद्र कश्यप सहायक अध्यापक हिंदी के द्वारा किया गया।






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