पुस्तक…
इतिहास की बातें
भविष्य का सपना
पुस्तकों जैसा कोई ना है मीत अपना
पुस्तक तो है ज्ञान का सागर
शुभ विचारों से भर देती मन का गागर
हर पन्ने पर होती है एक नई कहानी
भूत भविष्य वर्तमान की अजब जुबानी
बिना आवाज के सब
कुछ कह देती है
अंधेरे जीवन को
दीपक सा रोशन कर
देती है
यह थामती है हाथ
हमारा हमें राह
दिखाती है
मूर्खों को भी विद्वान
यह सहज बनाती है
सच्ची मित्र सच्चे
सखा सहेली है मेरी
ज्ञान की दौलत और पूंजी है बहुततेरी
अधूरी है पुस्तक के बिना यह दुनिया
सच कहती है बीना* रागी* सुन लो दादी नानी मुन्ना मुनिया.
— डा. बीना सिंह रागी
भिलाई छत्तीसगढ़
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