काम कर बस काम कर
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काम कर बस काम कर, ना एक पल तू आराम कर।
जब तक ना तेरी जय-जयकार हो, बस काम कर तू काम कर ॥
नींद-चैन को त्याग कर, भूख-प्यास को मार कर।
लज्जा-शर्म को पार कर, काम कर बस काम कर ॥
राह कठिन हो, पथ अँधियारा, काँटे हों या हो अंगारा।
डगमग मत होना एक क्षण भी, अपने लक्ष्य से प्यार कर॥
हार की बातें मन से हटा, संघर्षों से रिश्ता सजा।
जो गिरकर फिर उठ जाता है, इतिहास वही तैयार कर॥
आज पसीना जो बह जाएगा, कल सम्मान बन जाएगा।
जो स्वयं पर विश्वास रखे, वह पत्थर को भी हार कर ॥
जब नाम तेरा चमक उठेगा, तब श्रम का अर्थ समझेगा।
तू कर्मपथ का साधक बन,
बस काम कर… बस काम कर ॥

रचनाकार
सुनील कुमार भारद्वाज
मोo 7000150900






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