
रायपुर 22 फरवरी / छत्तीसगढ़ का बजट महज सन् 2000 में राज्य गठन के समय जहां बजट लगभग 5,700 करोड़ रुपए था, वहीं 2025-26 में यह बढ़कर 1 लाख 65 हजार करोड़ रुपए से अधिक हो चुका है। आगामी वित्त वर्ष 2026-27 में यह आंकड़ा 2 लाख करोड़ रुपए की दहलीज को छू सकता है। राज्य विधानसभा का बजट सत्र 23 फरवरी से शुरू होगा और 24 फरवरी को वित्त मंत्री ओपी चौधरी सदन में बजट पेश करेंगे। यह साय सरकार का तीसरा बजट और प्रदेश का 26वां बजट होगा। ‘ज्ञान’ और ‘गति’ के बाद इस बार भी एक नई थीम के साथ बजट लाने की तैयारी है।
टेंट में पेश हुआ पहला बजट
साल 2001 में तत्कालीन वित्त मंत्री रामचंद्र सिंहदेव ने राजकुमार कॉलेज ग्राउंड में टेंट के भीतर प्रदेश का पहला बजट पेश किया था। सीमित संसाधनों के दौर में सिंहदेव अपने सख्त वित्तीय अनुशासन के लिए जाने जाते थे। हर खर्च पर बारीकी से नजर और सरकारी खजाने के दुरुपयोग पर सख्त रुख ने उन्हें अलग पहचान दी। उस दौर में वित्तीय निर्णयों को लेकर राजनीतिक टकराव भी सामने आए।
जब सियासत भारी पड़ी
भाजपा शासनकाल में डॉ. रमन सिंह मुख्यमंत्री बने और वित्त विभाग की जिम्मेदारी अमर अग्रवाल को सौंपी गई। वर्ष 2006 में राजनीतिक घटनाक्रम ने करवट ली। भाजपा के कुछ विधायकों द्वारा नेतृत्व के खिलाफ आवाज उठाने के बाद विवाद बढ़ा और अमर अग्रवाल से वित्त विभाग वापस ले लिया गया। यह घटना बताती है कि कई बार बजट से अधिक सियासी समीकरण प्रभावी हो जाते हैं।
रमन राज में आय ने पकड़ी रफ्तार
इसके बाद मुख्यमंत्री रहते डॉ. रमन सिंह ने 12 बार बजट प्रस्तुत किया, जो अपने आप में एक रिकॉर्ड है। उनके कार्यकाल में प्रति व्यक्ति आय में चार बार 20 प्रतिशत से अधिक वृद्धि दर्ज की गई। बजट का आकार लगातार बढ़ा और आमदनी में भी सुधार देखा गया। हालांकि बाद के वर्षों में प्रति व्यक्ति आय की वृद्धि दर घटकर 10-11 प्रतिशत के आसपास रह गई।
गोबर का ब्रीफकेस बना पहचान
2018 में कांग्रेस की वापसी के बाद भूपेश बघेल ने छत्तीसगढ़िया अस्मिता को बजट प्रस्तुति से जोड़ा। वर्ष 2022 में उन्होंने गोबर से बने ब्रीफकेस में बजट पेश कर प्रतीकात्मक संदेश दिया। गोधन न्याय योजना और स्थानीय परंपराओं को आर्थिक नीति से जोड़ने की यह पहल चर्चा का केंद्र बनी।
ढोकरा शिल्प और डिजिटल दौर
17 वर्षों बाद प्रदेश को स्वतंत्र वित्त मंत्री के रूप में ओपी चौधरी मिले। उन्होंने आदिवासी कला ‘ढोकरा शिल्प’ से सुसज्जित ब्रीफकेस के साथ सदन में प्रवेश किया और पहली बार पूर्ण डिजिटल बजट पेश किया। उनका पहला बजट ‘ज्ञान’ — गरीब, युवा, अन्नदाता और नारी — पर केंद्रित था। दूसरा ‘गति’ की रणनीति पर आधारित रहा। अब तीसरे बजट में सुशासन, अधोसंरचना, तकनीक और इंफ्रास्ट्रक्चर विकास पर फोकस रहने के संकेत हैं।
25 साल में 25 गुना विस्तार
राज्य का बजट 5,700 करोड़ से बढ़कर 1.65 लाख करोड़ रुपए पार कर चुका है। 2026-27 में यह 2 लाख करोड़ के करीब पहुंच सकता है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार प्रदेश की प्रति व्यक्ति वार्षिक आय 1,62,870 रुपए है, जो प्रतिदिन लगभग 446 रुपए के बराबर है।
बड़ा सवाल अब भी बाकी
25 वर्षों में हर सरकार ने अपनी प्राथमिकताएं तय कीं — कहीं वित्तीय अनुशासन, कहीं सांस्कृतिक अस्मिता, तो कहीं तकनीकी नवाचार। बजट का आकार 25 गुना बढ़ा है, लेकिन असली कसौटी यही है कि क्या यह बढ़ोतरी आम नागरिक की आय, रोजगार और जीवन स्तर में उतनी ही तेजी से बदलाव ला पाई है?
24 फरवरी को पेश होने वाला बजट केवल आंकड़ों का दस्तावेज नहीं होगा, बल्कि यह तय करेगा कि 2 लाख करोड़ की ओर बढ़ता छत्तीसगढ़ विकास की नई परिभाषा गढ़ पाता है या नहीं।








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