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छ0ग0 प्रदेश के किसान संगठनों के प्रतिनिधियों की आवश्यक बैठक कलेक्ट्रेट गार्डन रायपुर में सम्पन्न हुआ जिसमें विभिन्न किसान, मजदूर एवं नागरिक संगठन के सदस्य हुए शामिल l

रायपुर / प्रदेश के किसान संगठनों के प्रतिनिधियों की आवश्यक बैठक कलेक्ट्रेट गार्डन रायपुर में सम्पन्न हुआ जिसमें विभिन्न किसान, मजदूर एवं नागरिक संगठन जैसे- छत्तीसगढ़ मुक्ति मोर्चा से जनक लाल ठाकुर, भारतीय किसान यूनियन (टिकैत )से तेजराम विद्रोही जिला किसान संघ बालोद से गैदसिंह ठाकुर, आदिवासी भारत महासभा से सौरा यादव, अखिल भारतीय क्रन्तिकारी किसान सभा से हेमंत टंडन, छत्तीसगढ़ किसान यूनियन धमतरी घनाराम साहू, किसान मजदूर संघ बिलासपुर से श्याम मूरत कौशिक, क्रन्तिकारी किसान यूनियन से रमाकांत बंजारे, किसान मजदूर महासंघ से पारसनाथ साहू, नदीघाटी मोर्चा से गौतम बंधोपाध्याय, स्पार्क से उमाप्रकाश ओझा, कृषक बिरादरी से पवन सक्सेना, छत्तीसगढ़ प्रगतिशील किसान संगठन दुर्ग से राजकुमार गुप्ता, उत्तम चंद्राकर, बाबूलाल साहू, बद्री प्रसाद पारकर, परमानंद यादव, ढालेश साहू, छत्तीसगढ़ मुक्ति मोर्चा मजदूर कार्यकर्त्ता समिति से कल्याण सिंह पटेल, किसान संघ बलौदाबाजार से लोकनाथ नायक आदि मुखिया साथी एवं सदस्य उपस्थित हुए।

बैठक की एजेंडा

  1. भारत अमेरिका व्यापार समझौता से किसानों एवं खेती पर होने वाले दुष्प्रभाव.
  2. एमएसपी की कानूनी गारंटी एवं छत्तीसगढ़ के किसानों को धान पर 3286/- प्रति क्विंटल की दर से अंतर की राशि जारी करने तथा एक साल का बकाया किस्त देने.
  3. हाइब्रिड बीज कम्पनी जैसे कावेरी, वी एन आर, टाटा आदि द्वारा किसानों को भुगतान नहीं देने.
  4. छत्तीसगढ़ में जारी जन आंदोलनों को सरकार द्वारा हिंसक बनाकर दमन करने.
  5. स्मार्ट मीटर, बिजली कटौती, कनेक्शन काटे जाने के सम्बन्ध में.
  6. खाद की कालाबाज़ारी करना एवं जबरदस्ती लदान दिए जाने के सम्बन्ध में.
  7. धान खरीदी पर हुए भ्र्ष्टाचार के सम्बन्ध में चर्चा.
    जैसे विषयों पर चर्चा किया गया।

अमेरिका-भारत व्यापार समझौता किसान विरोधी कदम है। जिस पर चिंता जाहिर किया कि-

  1. सस्ती विदेशी उपज से भारतीय किसान तबाह होंगेः- अमरिका की खेती भारी सब्सिडी पर आधारित, पूरी तरह मशीनीकृत और बड़े कॉर्पोरेट फार्म मॉडल पर आधारित है अगर भारत सोयाबीन, मक्का, गेंहूँ, डेयरी उत्पाद, दालों पर आयात शुल्क घटाता है तो सस्ती अमेरिकी फसल भारतीय मंडियों में आयेंगी। इससे भारतीय किसान जो पहले ही एममसपी की लड़ाई लड़ रहा है, वह इस प्रतिस्पर्धा में कैसे टिकेगा?
  2. डेयरी सेक्टर पर सीधा हमलाः भारत का डेयरी मॉडल छोटे और सीमांत किसानों पर आधारित, सहकारी व्यवस्था पर टिका हुआ है। मांस युक्त पशु आहार जैसी अमेरिकी डेयरी उत्पादों की आसानी से प्रवेश होने से लाखों दुग्ध उत्पादक परिवार प्रभावित होंगे जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर सीधा आघात है।
  3. एमएसपी और खाद्य सुरक्षा पर खतराः- व्यापार संतुलन के नाम पर भारत के ऊपर कृषि सब्सिडी कम करने, सार्वजनिक खरीद प्रणाली को कमजोर करने का दबाव होने से एमएसपी व्यवस्था, सार्वजनिक वितरण प्रणाली और खाद्य आत्मनिर्भरता पर प्रहार होगा।
  4. बीज और कॉर्पोरेट नियंत्रणः अमेरिकी कंपनियां पेटेंट आधारित बीज, बौध्दिक संपदा अधिकार के जरिये अपने किसानों को आत्मनिर्भर बनाती है जबकि भारत में आज भी किसान अपनी पारंपरिक बीज संचय व संरक्षण पर निर्भर है। बीज पर कंपनियों के हाथ में आने से भारतीय किसान अपनी पारंपरिक बीज स्वतंत्रता व नियंत्रण खो देगा।

इसलिए यह समझौता केवल व्यापार का मामला नहीं है बल्कि यह किसान की आय, ग्रामीण रोजगार, खाद्य सुरक्षा, राष्ट्रीय आर्थिक स्वायत्तता का प्रश्न है।

छत्तीसगढ़ के संदर्भ में चर्चा किया गया कि छत्तीसगढ़ के किसानों को केंद्र द्वारा वृद्धि की गई न्यूनतम समर्थन मूल्य में हुए बढ़ोतरी के साथ धान पर 3286 रूपये प्रति क्विंटल की दर से अंतर की राशि मिलनी चाहिए, पिछले सरकार का एक किस्त बकाया किसानों को मिले और न्यूनतम समर्थन मूल्य की लागत मूल्य सी- 2 पर 50% लाभ जोड़कर घोषित किया जाना चाहिए

गाँव स्तर पर अभियान चलाने के लिए एक पाम्पलेट बनाया जायेगा जिसकी ड्राफ्ट बनाने की जिम्मेदारी तेजराम विद्रोही का है जिसे सभी सदस्य मिलकर अंतिम रूप देंगे.

संयुक्त अभियान में जोड़ने के लिए डेयरी, वन अधिकार, खाद्य सुरक्षा आदि से जुड़े संगठनों एवं बुध्दिजीवीयों से सम्पर्क किये जायेंगे.

भारत अमेरिका व्यापार समझौता एवं छत्तीसगढ़ के किसानों के विषय पर 23 फरवरी को रायपुर प्रेस क्लब में पत्रकार वार्ता किये जायेंगे.

भारत अमेरिका व्यापार समझौता के विषय पर 27 फरवरी को राज्यपाल और मुख्यमंत्री से मुलाक़ात कर किसानों की चिंता से अवगत कराएंगे ताकि भारत सरकार समझौता पर हस्ताक्षर न करे.

भारत अमेरिका व्यापार समझौता के विषय पर 09 मार्च को इस ग्राम स्तर पर अभियान चलाया जायेगा और अप्रैल माह में व्यापक कन्वेंशन आयोजित की जाएगी जिसमें राष्ट्रीय स्तर से कृषि विशेषज्ञ और संयुक्त किसान मोर्चा के नेतागण शिरकत करेंगे.

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