(आलेख ; स्वराज्य करुण
रायपुर / 3 दिसम्बर को छत्तीसगढ़ के सुप्रसिद्ध कवि,स्वतंत्रता संग्राम सेनानी,लेखक,पत्रकार और इतिहासकार हरि ठाकुर की पुण्यतिथि है। उनका जन्म 16 अगस्त 1927 को रायपुर में और निधन 3 दिसम्बर 2001 को दिल्ली के एक अस्पताल में हुआ। वे अधिवक्ता भी रहे । उन्हें छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण आंदोलन के लिए वर्ष 1992 में गठित सर्वदलीय मंच का संयोजक बनाया गया । इस महत्वपूर्ण दायित्व को भी उन्होंने बखूबी निभाया।
आंदोलन की मशाल एक साहित्यकार के हाथों में आयी तो कई नये और पुराने साहित्यकार भी उनके साथ जुड़ने लगे। इसके पहले वर्ष 1967 में डॉ. खूबचन्द बघेल ने उन्हें छत्तीसगढ़ भातृ संघ के महासचिव का दायित्व सौंपा था । इस ज़िम्मेदारी का भी उन्होंने गंभीरता से निर्वहन किया । हरि ठाकुर के सुपुत्र आशीष सिंह भी एक अच्छे लेखक और पत्रकार थे, जो अपने पिता की साहित्यिक परम्परा को अपने लेखों और अपनी किताबों के जरिए आगे बढ़ा रहे थे, लेकिन दुर्भाग्यवश 7सितम्बर 2025 को रायपुर में उनका निधन हो गया ।
हरि ठाकुर एक तपस्वी कवि और लेखक थे । चाहे वर्ष 1857 के स्वतंत्रता संग्राम में शहीद हुए सोनाखान वीर नारायण सिंह की जीवन गाथा हो या उनके बलिदान के बाद रायपुर की ब्रिटिश सैन्य छावनी में अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ़ हुए विद्रोह के नायक वीर हनुमान सिंह और उनके साथ शहीद हुए सैनिकों की जानकारी,छत्तीसगढ़ से जुड़ी इस प्रकार की अनेक ऐतिहासिक घटनाएँ हरि ठाकुर की लेखनी से जन -जन तक पहुँची ।
उन्होंने अपने पिता स्वर्गीय ठाकुर प्यारेलाल सिंह द्वारा रायपुर में वर्ष 1950 में शुरू किए गए अर्ध -साप्ताहिक ‘राष्ट्रबन्धु ‘ का वर्ष 1966 से पुनर्प्रकाशन प्रारंभ किया । साप्ताहिक के रूप में यह समाचार पत्र वर्ष 1978 तक प्रकाशित हुआ।
हरि ठाकुर ने हिन्दी और छत्तीसगढ़ी में कई कविता -संग्रहों का भी सृजन और प्रकाशन किया। इनमें लोहे का नगर (वर्ष 1967), छत्तीसगढ़ी गीत अउ कविता (वर्ष 1968 ), गीतों के शिलालेख (वर्ष 1969) , जय छत्तीसगढ़ ( वर्ष 1977) , सुरता के चंदन (वर्ष 1979) और पौरुष -नये संदर्भ (वर्ष 1980 ) भी उल्लेखनीय हैं। हरि ठाकुर दूसरी छत्तीसगढ़ी फ़िल्म ‘घर-द्वार’ के गीतकार भी थे।इसका निर्माण वर्ष 1965 से 1970 के बीच भनपुरी (रायपुर)के विजय कुमार पांडेय ने किया था।
हरि ठाकुर हालांकि विधायक या सांसद नहीं थे ,लेकिन उनका साहित्यिक व्यक्तित्व और कृतित्व इतना विशाल था कि उनके निधन के अगले दिन 4 दिसम्बर 2001को छत्तीसगढ़ विधानसभा शीतकालीन सत्र की बैठक में उन्हें विशेष रूप से श्रद्धांजलि अर्पित की गयी। तत्कालीन अध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद शुक्ल,तत्कालीन मुख्यमंत्री अजीत जोगी और नेता प्रतिपक्ष नंदकुमार साय सहित सदन में पक्ष और विपक्ष के अनेक वक्ताओं ने छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण आंदोलन में हरि ठाकुर के योगदान को याद करते हुए उनके देहावसान पर शोक प्रकट किया। उनके सम्मान में सदन में दो मिनट का मौन धारण किया गया। लेखक और कवि डॉ. राजेन्द्र सोनी (अब स्वर्गीय )द्वारा सम्पादित साहित्यिक पत्रिका ‘पहचान यात्रा ‘का जनवरी -जून 2002 का संयुक्तांक स्वर्गीय हरि ठाकुर और उनकी रचनाओं पर केन्द्रित विशेषांक के रूप में प्रकाशित किया गया।
हरि ठाकुर सिर्फ़ कवि नहीं ,बल्कि गद्य -विधा के भी सशक्त हस्ताक्षर थे। उनके विशाल ग्रंथ ‘छत्तीसगढ़ गौरव गाथा ‘ का प्रकाशन वर्ष 2003 में हुआ। इस ग्रंथ में छत्तीसगढ़ की ऐतिहासिक , भौगोलिक ,सामाजिक -सांस्कृतिक विशेषताओं पर उनके विस्तृत आलेख तो हैं ही ,इसमें उनकी कलम से राज्य की महान विभूतियों की जीवनगाथाओं का भी समावेश है। यह ग्रंथ हरि ठाकुर स्मारक संस्थान रायपुर द्वारा प्रकाशित किया गया।
संकलनकर्ता : इस्माइल आजाद – कवि एवं साहित्यकार जामुल, भिलाई नगर जिला दुर्ग छत्तीसगढ़.








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