कोलकाता 21 दिसंबर/ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत ने कहा है कि संघ को किसी राजनीतिक नजरिए से समझना गलत होगा। कोलकाता में आयोजित RSS के 100 व्याख्यान माला कार्यक्रम में उन्होंने स्पष्ट किया कि संघ किसी राजनीतिक उद्देश्य या प्रतिस्पर्धा के लिए नहीं बना, बल्कि हिंदू समाज के संगठन, उन्नति और संरक्षण के लिए समर्पित है।
भागवत ने कहा कि संघ का मूल उद्देश्य भारत की परंपरा और विरासत को बनाए रखते हुए देश को विश्व गुरु बनाना है। उन्होंने जोर देकर कहा कि संघ का जन्म राजनीतिक उद्देश्यों, विरोध या चुनावी लाभ के लिए नहीं हुआ। संघ का काम समाज के विकास, संगठन और हिंदू संस्कृति की रक्षा करना है।
उन्होंने इतिहास का उदाहरण देते हुए बताया कि सुभाष चंद्र बोस के निधन के बाद अंग्रेजों के खिलाफ सशस्त्र संघर्ष समाप्त हो गया, लेकिन समाज सुधार की प्रक्रिया निरंतर जारी रही। भागवत ने इसे समुद्र में एक स्थायी द्वीप की तरह बताया जो लगातार चलता रहा।
मोहन भागवत ने कहा कि भारत एक महान विरासत वाला देश है और अब देश को वैश्विक नेतृत्व की भूमिका के लिए तैयार होना होगा। अतीत में युद्धों में हार का सामना किया गया, लेकिन अब समाज को मजबूत करना आवश्यक है।
RSS के 100 वर्ष पूरे होने के अवसर पर मोहन भागवत ने संघ की विचारधारा, राष्ट्र की शक्ति और वैश्विक भूमिका पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि संघ का उद्देश्य समाज को संगठित करना और देश को विश्व स्तर पर नेतृत्व प्रदान करने के लिए तैयार करना है।








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