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“छेरी बैंक” की शुरुआत, छेरी यानी बकरी के जरिए महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की, कि जा रही है कोशिश।

सरगुजा 26 मार्च / छत्तीसगढ़ के सरगुजा से एक ऐसी पहल सामने आई है, जिसने गांव की महिलाओं की जिंदगी बदलने की दिशा में नया रास्ता खोल दिया है। यहां अब बैंक में पैसे नहीं, बल्कि बकरियों का लेन-देन होगा।

सरगुजा जिले में महिला सशक्तिकरण के लिए लगातार नए प्रयोग किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में अब ‘छेरी बैंक’ की शुरुआत की गई है। यहां छेरी यानी बकरी के जरिए महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की कोशिश की जा रही है।

यह अनोखा बैंक लखनपुर विकासखंड के कुंवरपुर गांव में जिला पंचायत के राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत महिला समूहों द्वारा संचालित किया जा रहा है। इस बैंक में पैसे की जगह बकरियों का लेन-देन होगा।

छेरी बैंक की संचालिका अनीता बताती हैं कि जरूरतमंद महिलाओं को 4 बकरियां दी जाती हैं। इसके लिए उनसे 3 हजार रुपये सदस्यता शुल्क लिया जाता है। इस राशि से 40 महीनों तक बकरियों की देखभाल, टीकाकरण और इलाज की जिम्मेदारी पशु सखी निभाती हैं।

इन 40 महीनों में 4 बकरियों से लगभग 32 मेमनों का जन्म होता है। इसमें से 16 मेमने बैंक को किस्त के रूप में वापस देने होते हैं, जबकि बाकी 16 मेमनों पर लाभार्थी का अधिकार होता है।

इस योजना से जुड़ी हितग्राही सुमित्रा सिंह बताती हैं कि इस व्यवस्था से उन्हें अच्छी आमदनी की उम्मीद है। एक बकरा 8 से 10 हजार रुपये तक बिकता है, जिससे करीब एक लाख रुपये से ज्यादा की कमाई संभव है।

इस योजना के तहत बेहतर नस्ल की बकरियां भी उपलब्ध कराई जा रही हैं। गुमला (झारखंड) और उत्तर प्रदेश से लाई गई बकरियों को लोन के रूप में महिलाओं को दिया जा रहा है। एक महिला एक बार में 4 बकरी ले सकती है और बदले में उसे 40 महीनों में 16 मेमने लौटाने होते हैं।

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