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स्वास्थ्य मंत्रालय ने रविवार को सभी राज्यों को एडवाइजरी जारी कर दी है, जिसमें निर्देश दिया गया है कि बिना डॉक्टर के प्रिस्क्रिप्शन के किसी भी कफ सिरप या दवा की बिक्री न की जाए। उल्लंघन करने पर मेडिकल स्टोर संचालकों के खिलाफ की जायेगी सख्त कार्रवाई..

सी. जी. प्रतिमान न्यूज :

रायपुर 6 अक्टूबर / मध्य प्रदेश में ‘कोल्ड्रिफ’ कफ सिरप पीने से 14 बच्चों की मौत के बाद केंद्र सरकार सतर्क हो गई है। स्वास्थ्य मंत्रालय ने रविवार को सभी राज्यों को एडवाइजरी जारी कर दी है, जिसमें निर्देश दिया गया है कि बिना डॉक्टर के प्रिस्क्रिप्शन के किसी भी कफ सिरप या दवा की बिक्री न की जाए। उल्लंघन करने पर मेडिकल स्टोर संचालकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। एडवाइजरी के बाद छत्तीसगढ़ सरकार भी अलर्ट मोड पर आ गई है। राज्य के खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने सभी जिलों में मेडिकल स्टोर्स की सरप्राइज जांच करने के आदेश दिए हैं। एडिशनल ड्रग कंट्रोलर बीआर साहू ने बताया कि डॉक्टर के पर्चे पर ही दवा देने का नियम पहले से लागू है, अब इसका सख्ती से पालन करवाया जाएगा।

छत्तीसगढ़ में नहीं बिक रहा ‘कोल्ड्रिफ’ सिरप
रायपुर दवा संघ के उपाध्यक्ष अश्वनी विग ने स्पष्ट किया कि विवादित ‘कोल्ड्रिफ’ कफ सिरप छत्तीसगढ़ में अभी लॉन्च नहीं हुआ है। इसे तमिलनाडु की श्री सन फार्मा कंपनी बनाती है, जिसका राज्य में कोई डिपो नहीं है। इसलिए इस ब्रांड का स्टॉक प्रदेश में उपलब्ध नहीं है। उन्होंने कहा कि राज्य में केवल वही दवाएं बिकती हैं जिन्हें नियंत्रक खाद्य एवं औषधि प्रशासन की अनुमति प्राप्त होती है।

राज्य में 8 हजार मेडिकल स्टोर्स
रायपुर में लगभग 3 हजार और पूरे प्रदेश में 8 हजार से अधिक मेडिकल स्टोर्स हैं। एसोसिएशन के पदाधिकारियों का कहना है कि सभी दुकानें शेड्यूल H-1 की श्रेणी के नियमों का पालन कर रही हैं। प्रदेश में दवा कारोबार का सालाना टर्नओवर करीब 500 करोड़ रुपए का है।

केंद्र सरकार की एडवाइजरी में तीन वर्गों के लिए निर्देश:

मरीजों के लिए:

सर्दी-खांसी या बुखार की स्थिति में तुरंत सरकारी अस्पताल जाएं।
6 घंटे तक बच्चा पेशाब नहीं कर रहा हो तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
झोलाछाप डॉक्टरों से इलाज न करवाएं, न ही बिना पर्चे के दवा खरीदें।
उबला हुआ पानी पीएं, ताजा भोजन करें और स्वच्छता बनाए रखें।
मेडिकल स्टोर्स के लिए:

बिना प्रिस्क्रिप्शन के कोई भी कंबिनेशन ड्रग या कफ सिरप न दें।
प्रतिबंधित या संदिग्ध फॉर्मूला वाले उत्पाद न बेचें।
किसी भी एंटीबायोटिक दवा की बिक्री डॉक्टर के पर्चे के बिना न करें।


डॉक्टरों के लिए:

बच्चों को पहले से दी जा रही दवाओं की निगरानी रखें।
यदि बच्चा 6 घंटे तक पेशाब न करे तो उसे ऑब्जर्वेशन में रखें और आवश्यकता पड़ने पर हायर सेंटर रेफर करें।
मध्य प्रदेश रिपोर्ट में सामने आई चौंकाने वाली सच्चाई
छिंदवाड़ा जिले में बच्चों की मौत के बाद आई सरकारी जांच रिपोर्ट में पाया गया कि ‘कोल्ड्रिफ’ कफ सिरप में 46.2% डायएथिलिन ग्लायकॉल (DEG) मौजूद था, जबकि तमिलनाडु की रिपोर्ट में यह मात्रा 48.6% पाई गई। यही जहरीला तत्व बच्चों की किडनी फेल होने की वजह बना।

‘नेक्स्ट्रो-डीएस’ और ‘मेफटॉल पी’ सिरप की रिपोर्ट फिलहाल ‘ओके’ बताई गई है। कुल 19 दवाओं के सैंपल लिए गए थे, जिनमें से 12 की रिपोर्ट आ चुकी है। शेष 7 रिपोर्ट का इंतजार है।

देशभर में बढ़ी सतर्कता
तमिलनाडु और मध्य प्रदेश के बाद राजस्थान में भी कफ सिरप से मौत के मामले सामने आए हैं। सीकर, भरतपुर और चुरू में तीन बच्चों की मौत के बाद राजस्थान सरकार ने केसंस फार्मा कंपनी की सभी 19 दवाओं पर रोक लगाते हुए राज्य के ड्रग कंट्रोलर को निलंबित कर दिया है। देशभर में स्वास्थ्य विभाग अब सक्रिय हो गया है और ‘कोल्ड्रिफ’ व ‘नेक्स्ट्रो-डीएस’ कफ सिरप को बैन कर दिया गया है। केंद्र ने राज्यों से कहा है कि ऐसी किसी भी दवा की बिक्री या वितरण पर तुरंत रोक लगाई जाए, जिससे बच्चों की जान को खतरा हो सकता है।

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