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अफीम, गांजा, चरस और भांग- चार नाम, लेकिन नशे की दुनिया में इनका असर और पहचान बिल्कुल अलग- अलग है..

सीजी प्रतिमान न्यूज़ /छत्तीसगढ़ फिलहाल सूखे नशे की गिरफ्त में है।अफीम और गांजा दोनों ही नशीले पदार्थ हैं। अफीम पोस्त के पौधे से प्राप्त होती है, इसमें मॉर्फिन जैसे घटक होते हैं।गांजा,कैनाबिस (भांग) के पौधे से प्राप्त होता है, मुख्य रूप से मादा पौधों के फूलों और पत्तियों से बनता है और मानसिक उत्तेजना का कारण बनता है ये दोनों स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हैं, इनका सेवन नशा पैदा करता है।

अफीम, गांजा, चरस और भांग- चार नाम, लेकिन नशे की दुनिया में इनका असर और पहचान बिल्कुल अलग- अलग है। कई लोग इन्हें एक जैसा समझ बैठते हैं, लेकिन असली फर्क इतना चौंकाने वाला है कि जानकर हैरान रह जाएंगे। कौन सा नशा कैसे बनता है?

किसकाअसर सबसे तेज होता है?

और कौन सी चीज शरीर को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाती है?

सवालों का जवाब ऐसी दुनिया के भीतर ले जाएगा, पौधे से लेकर पाउडर तक हर कदम पर छिपा है खतरनाक सच.. नशे का नाम उठते ही पहले गांजा,चरस,अफीम,भांग जैसे शब्द सामने आते हैं. दिखने में एक जैसे लगने वाले नशे वास्तव में अलग तरीके से तैयार किये जाते हैं,शरीर पर इनका असर भी अलग होता है।भारत में इनके उपयोग, उत्पादन को लेकर कानून काफी सख्त हैं,फिर भी इनके बारे में लोगों में आधी-अधूरी जानकारी रहती है।भ्रम को दूर करने के लिए जरूरी है कि इनके बनने के तरीके, असर और नुकसान को सरल शब्दों में समझा जाए।

अफीम पोस्त के पौधे से निकलने वाला सख्त, चिप चिपा रस होता है, जब पौधे की फलियों पर कट लगाई जाती है, तो निकलने वाला सफेद दूध जैसा लिक्विड हवा लगते ही भूरा हो जाता है,यही सूखा हुआ पदार्थ अफीम कहलाता है। इसमें मॉर्फिन, कोडीन जैसे अत्यधिक नशीले तत्व होते हैं। अफीम का तो असर बहुत तेज होता है और यह शरीर की नसों को सुन्न कर देती है,नशा लंबा चलताहै, एडिक्शन होने की संभावना बेहद ज्यादा होती है।

गांजा भांग के पौधे की पत्तियों और फूलों को सुखाकर मिलता है। इसमें THC (Tetrahydro cannabinol) का रसायन होता है, जो दिमाग पर सीधे असर डालता है,गांजे का नशा मध्यम स्तर का माना जाता है,यह मूड, सोच, टाइम -सेंस को प्रभावित करता है, लेकिन ओपियम जितना खतरनाक नहीं माना जाता है।

चरस भी भांग के पौधे से ही बनती है, लेकिन इसकी प्रक्रिया अलग होती है। ताजे पौधे के फूलों को ही हाथ से रगड़कर एक काला, चिकना रेजिन निकाला जाता है,यही चरस है, यह गांजे से काफी ज्यादा नशीला होता है,चरस का असर तेज, गहरा होता है। चरस का सेवन गंजे की तरह ही किया जाता है. कम मात्रा में भी इसके नशे का प्रभाव लंबा चलता है।

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